लाहौरवाले दाता गंज बख़्श

अजमेर के महान सूफ़ी हज़रत मोईनुद्दीन चिश्ती ने लाहौर के सूफ़ी दाता गंज बख़्श साहिब के बारे में कहा था – “गंज बख़्श-ए-फ़ैज़-ए-आलम, मज़हर-ए-नूर-ए-ख़ुदा / नक़ीसान रा पीर-ए-कामिल, कामिलान रा रहनुमा”.

पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा क्यों नहीं

सरकारी आंकड़ों के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया है कि देश में क़रीब 19 लाख बसें हैं, जिनमें से 2.8 लाख राजकीय परिवहन विभागों/निगमों द्वारा चालित हैं या उन्हें परिचालन का परमिट है. सरकार का आकलन है कि आम यात्रियों की ज़रूरत पूरी करने के लिए कम-से-कम 30 लाख बसें चाहिए.

राजीव गांधी और राजनीति के पेंच

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कामकाज पर बहुत कुछ अच्छा और ख़राब कहा जा सकता है, लेकिन इस सच से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें कई त्रासदियों से गुज़रना पड़ा.

इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) की कुछ ख़ास बातें

पूरी रिपोर्ट देखें, तो एक दिलचस्प मामला है. टीवी, रेडियो और पत्रिका में वृद्धि है, पर अख़बार और सिनेमा में मामला सपाट है. लेकिन मीडिया उपभोग में कुल मिलाकर बढ़ोतरी के कारण अख़बार और सिनेमा में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ी है.

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