संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक परिषद में इज़रायल के पक्ष में भारत का मतदान करना एक असाधारण घटना है.
भारतीय छात्र: रियल इस्टेट, कोचिंग बिज़नेस
देश में कोचिंग और परीक्षा तैयारी केंद्रों का सालाना बिज़नेस 49,400 करोड़ (सात अरब डॉलर) का है.
सीईओ का सालाना वेतन = मज़दूर के 941 साल
इस भयानक अनैतिक समय में हम यह आग्रह भी नहीं रख सकते कि पैसा कमाने का नैतिक रास्ता क्या है.
Prof. Sen! Modi’s also won the battle of ideas.
A comment on Prof Amartya Sen's article published in the NYT
मर्डोक मीडिया और ऑस्ट्रेलिया का चुनाव
क्या कोई राजनेता रूपर्ट मर्डोक के साम्राज्य से लोहा ले सकता है और जीत सकता है?
लिबरल सरलीकरण है आतिश तासीर का लेख
भारतीय दक्षिणपंथ की सोच और हरकतें पोंज़ी फ़्रॉड की तरह होती हैं.
लाहौरवाले दाता गंज बख़्श
अजमेर के महान सूफ़ी हज़रत मोईनुद्दीन चिश्ती ने लाहौर के सूफ़ी दाता गंज बख़्श साहिब के बारे में कहा था – “गंज बख़्श-ए-फ़ैज़-ए-आलम, मज़हर-ए-नूर-ए-ख़ुदा / नक़ीसान रा पीर-ए-कामिल, कामिलान रा रहनुमा”.
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा क्यों नहीं
सरकारी आंकड़ों के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया है कि देश में क़रीब 19 लाख बसें हैं, जिनमें से 2.8 लाख राजकीय परिवहन विभागों/निगमों द्वारा चालित हैं या उन्हें परिचालन का परमिट है. सरकार का आकलन है कि आम यात्रियों की ज़रूरत पूरी करने के लिए कम-से-कम 30 लाख बसें चाहिए.
राजीव गांधी और राजनीति के पेंच
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कामकाज पर बहुत कुछ अच्छा और ख़राब कहा जा सकता है, लेकिन इस सच से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें कई त्रासदियों से गुज़रना पड़ा.
इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) की कुछ ख़ास बातें
पूरी रिपोर्ट देखें, तो एक दिलचस्प मामला है. टीवी, रेडियो और पत्रिका में वृद्धि है, पर अख़बार और सिनेमा में मामला सपाट है. लेकिन मीडिया उपभोग में कुल मिलाकर बढ़ोतरी के कारण अख़बार और सिनेमा में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ी है.
