ऐसा धन हस्तांतरण संभवत: फिर कभी नहीं हो सकेगा. इसकी कुछ वजहें हैं. भारत और चीन जैसे सबसे बड़ी आबादी के देशों के साथ-साथ बहुत सारे देशों में जनसंख्या घट रही है. इस कारण धरती की आबादी अब कभी भी आज से दुगुनी यानी 16 अरब नहीं हो पायेगी.
जब पूंजी कांपती है, हम सब कांपते हैं
साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट की चिंताजनक छाया एक बार फिर मंडरा रही है। कार्ल मार्क्स का कहना था कि पैसा इतिहास की धारा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है और इस पैसे की धारा तय करनेवाली बैंकिंग व्यवस्था को थॉमस जेफरसन आजादी के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते थे। आर्थिक मंदी... Continue Reading →
