अगर दुनिया की राजनीति और कॉरपोरेट जगत के नैतिक पतन का पाताल देखना हो, तो हथियारों के कारोबार पर नज़र डालना चाहिए, चाहे वो कारोबार युद्ध के हथियारों व साजों-सामान के हों या छोटे हथियारों के.
नशे के हवाले से कुछ फूटकर टिप्पणियाँ
जिन बातों का सबसे ज़्यादा ख़्याल रखना चाहिए, वहीं बातें बहस में नहीं होतीं.
The idea of ‘Soft Power’ As A Dangerous Nonsense
Soft Power! Is it something?
