कृषि कानून समर्थक पत्रकारों की बेचैनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन भयावह कृषि क़ानूनों की वापसी की घोषणा किसान आंदोलन की बड़ी जीत है. इस शांतिपूर्ण संघर्ष में सैकड़ों किसानों ने अपना जीवन बलिदान किया है. इस आंदोलन के दौरान किसानों को हर तरह से प्रताड़ित और अपमानित करने की कोशिश हुई. अब जब क़ानून रद्दी में फेंके जा रहे हैं, तो इन क़ानूनों के समर्थक पत्रकारों की प्रतिक्रिया देखना दिलचस्प है. ऐसे कुछ पत्रकारों के ट्वीट देखें-

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