सार्वभौम बुनियादी आय (Universal Basic Income): आवश्यकता या विवशता? 

देश-दुनिया के अनुभवों को लेते हुए भारत में समुचित बुनियादी आय (Universal Basic Income) लागू करने के बारे में गंभीरता से सोचा जाना चाहिए. विभिन्न उपायों से धन जुटाना और सामाजिक कल्याण की अन्य योजनाओं के साथ इसका समायोजन करना विशेष चुनौती नहीं है. 

हथियार कारोबार का अंडरवर्ल्ड

अगर दुनिया की राजनीति और कॉरपोरेट जगत के नैतिक पतन का पाताल देखना हो, तो हथियारों के कारोबार पर नज़र डालना चाहिए, चाहे वो कारोबार युद्ध के हथियारों व साजों-सामान के हों या छोटे हथियारों के.

इतिहास का सबसे बड़ा धन हस्तांतरण

ऐसा धन हस्तांतरण संभवत: फिर कभी नहीं हो सकेगा. इसकी कुछ वजहें हैं. भारत और चीन जैसे सबसे बड़ी आबादी के देशों के साथ-साथ बहुत सारे देशों में जनसंख्या घट रही है. इस कारण धरती की आबादी अब कभी भी आज से दुगुनी यानी 16 अरब नहीं हो पायेगी.

चीन में तीसरी संतान की अनुमति के मायने

जनसंख्या और विकास के मामले में अक्सर भारत की तुलना चीन से की जाती है. लेकिन यह विडंबना ही है कि हम जनसंख्या रोकने और जनसांख्यिकीय लाभांश की बात एक ही सांस में कर जाते हैं. हमारे देश में 2018 से 2030 के दशक के मध्य तक जनसांख्यिकी लाभांश की स्थिति रहेगी और 2050 के दशक में यह बदल जायेगी.

ब्रिक्स को ट्रम्प की खोखली चेतावनी 

अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ब्रिक्स देशों को यह गारंटी देनी होगी कि वे कोई नयी ब्रिक्स मुद्रा नहीं बनायेंगे और न ही डॉलर को हटाने के लिए किसी अन्य मुद्रा को अपनायेंगे. ऐसा नहीं करने पर उन्होंने 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की धमकी दी है. इस संबंध में कुछ बातों को रेखांकित किया जाना चाहिए.

‘बुलशिट जॉब्‍स’ से मुक्ति के सवाल पर भी सोचा जाए!

युवाओं के पास दो ही विकल्प हैं. या तो वे कोई ‘बुलशिट जॉब’ पकड़ लें, जिससे किराया तो चुका सकें, पर भीतर घुटते रहें, या फिर आप लोगों की देखभाल करने या लोगों की ज़रूरत को पूरा करने का कोई काम करें, लेकिन ऐसे कामों में आपको इतनी कम कमाई होगी कि आप अपने परिवार को भी पाल-पोस नहीं पायेंगे.

क्रिप्टो कथा: स्पष्ट नियमन न होने से बढ़ती अड़चनें  

पिछले साल ब्रोकर डिस्कवरी फ़र्म ब्रोकरचूज़र ने बताया था कि क्रिप्टो के भारतीय निवेशकों की संख्या 10.07 करोड़ है. इस हिसाब से संख्या के मामले में भारत दुनिया में पहले पायदान पर है.

शादी की आयु बढ़ाना बेमतलब पहल

दुनिया में सबसे ज़्यादा बालिका वधुएँ भारत में हैं और वैश्विक संख्या में उनका हिस्सा लगभग एक-तिहाई है. देश में 18 साल से कम आयु की ब्याहताओं की तादाद कम-से-कम 15 लाख है तथा 15 से 19 साल की क़रीब 16 फ़ीसदी लड़कियों की शादी हो चुकी है.

A Wishful Thinking Or A Misplaced Optimism!

It is high time for us to realise and to accept that there is no possibility of any ray of redress in the current economic and fiscal dungeon helmed by a political realm infected, for too long, at least for three decades, with two viruses- the Neo-con and the Neo-lib.

जेरूसलम में जीसस

अब्राहम की परंपरा से निकले तीन धर्मों- यहूदी, ईसाइयत और इस्लाम- के प्रवर्तकों में अकेले जीसस ही हैं, जो जेरूसलम पहुँचे और वहाँ उन्होंने धर्म और ईश्वर के बारे में बयान दिया.

‘द प्रोटोकॉल्स ऑफ़ एल्डर्स ऑफ़ ज़ायन’ किताब की दिलचस्प कथा

बीसवीं सदी के बिल्कुल शुरू में यहूदियों के ख़िलाफ़ माहौल बनाने के लिए यह फ़र्ज़ी किताब छापी गयी. वर्ष 1901-03 के बीच रूस में तैयार यह किताब बहुत जल्दी ओस्मानिया साम्राज्य (तुर्की) और यूरोप पहुँच गयी.

निजी क्षेत्र में आरक्षण समय की ज़रूरत ​है

निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग की वैधता पर विचार करने से पहले यह उल्लेख कर देना ज़रूरी है कि आरक्षण के मसले पर मेरिट, सामान्य श्रेणी या अगड़ों के साथ अन्याय तथा निजी क्षेत्र की स्वायत्तता में बेमानी दख़ल जैसे तर्कों पर फ़ालतू चर्चा का अब कोई मतलब नहीं है.

चेहराविहीन दुनिया में कैसे रहा जायेगा!

आगम्बेन ने पूछा है- पॉलिटिक्स की जगह इकोनॉमिक्स को लानेवाले इस सिस्टम को क्या मानवीय कहा जा सकता है और क्या चेहरे, दोस्ती, प्यार जैसे संबंधों को खोने की भरपाई एक एब्सट्रैक्ट और काल्पनिक स्वास्थ्य सुरक्षा से हो सकती है?

रॉबर्ट फ़िस्क: आंखो देखी लिखने वाला पत्रकार

बीते पांच दशकों के अपने सुदीर्घ पेशेवर जीवन में उन्होंने संभवत: हर उस बड़ी घटना को नज़दीक से देखा, जिसने हमारी आज की दुनिया को बनाने-बिगाड़ने में उल्लेखनीय भूमिका निभायी.

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